मेरी अंसुवन भींगी साड़ी आ जाओ कृष्णा मुरारी

अरी मेरी अंसुवन भींगी साड़ी आ जाओ कृष्णा मुरारी,
एक लुप्त सुता की विनती सुन लेना कृष्णा मुरारी,
अरे सब लोग हंसे दें दें ताली आ जाओ कृष्णा मुरारी,
वो भीष्म पिता बलशाली और पांचों पति निहारी,
अरे मोहे सभ में करत उघारी,
आ जाओ कृष्णा मुरारी,......
क्या भूल गये बनवारी जब उंगली कटीं तुम्हारी,
अरे मैंने फाड़ी रेशम साड़ी,
आ जाओ कृष्णा मुरारी......,
इतना सुनकर बनवारी और छोड़ी गरूड़ संवारी,
राधा पूछें रूक्मणी पूछें तुम कहां चले बनवारी
आ जाओ कृष्णा मुरारी.....
आ पहुंचे हैं बनवारी आकर के चीर बड़ाई,
अरे वो हार गये बलशाली,
आ जाओ कृष्णा मुरारी....
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